fistula grades

बवासीर, भगंदर और मलद्वार से रक्तस्राव अत्यतं सामान्य बीमारी है जिससे हर दो में एक व्यक्ति किसी न किसी रूप मे पीडि़त है। पाइल्स होना किसी कि ख़ुद कि गलती नही होती ये किसी को भी हो सकता है । इसमे शर्म के कारण अत्यधिक नुकसान होने के शक्य्ता रहती है । वरिश्ठ शलय चिकित्सक डॉ आशीष भनोट कहते हैं कि गुदा में किसी भी प्रकार की तकलीफ के लक्षणो को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण फिस्सुरे या फिस्टुला जैसे अन्य रोगो के लक्षण भी हो सकते हैं और, बहुत कम संभावना इस बात की भी हो सकती है कि यह कैंसर जैसे गंभीर रोगो के लक्षण हो।

डा. भनोट के अनुसार बवसीर और लटके हुए मस्सों का सबसे कारगर इलाज है स्तप्लेर ट्रीटमेंट । यह एक नई और अनोखी तकनीकी है जो चीर-फाड़ और पीड़ा के बगैर ही शानदार परिणाम देती है। इस तकनीक से मरीजो को उस तकलीफ से भी नहीं गुजरना पड़ता जो कि पारंपरिक शल्य चिकित्सा जैसे हर पाइल मास को बांधकर काट देना या लेजर पद्धति है।

गुदा में फिस्टुला का इलाज में एक नवीनतम तकनीक VAAFT के इस्तेमाल से देश विदेश से आये बहुत से जटिल फिस्टुला से पीड़ित लोगो का नोवा स्पेशल्टी हॉस्पिटल्स में सफल इलाज़ किया गया है । डॉ. आशीष भनोट ने बताया इस इलाज़ से फायदा ले चुके बहुत से रोगियो के पहले कई विफल ओपेरेशन्स हो चुके थे । इन रोगियो में कुछ ऐसे भी थे जिनमे ना केवल बीमारी वैसे के वैसे बनी थी बल्कि बहुत से रोगियो को फिस्टुला के विफल इलाज़ के कारण का अत्ति खून बहना, गुदा द्वार का कण्ट्रोल ख़त्म होने कि और असहनीय दर्द व अन्य परेशानिया सहन करनी पढ़ रही थी । इस तकनीक द्वारा कुछ ऐसे लोगो को भी फायदा हुआ जो ठीक होने कि सब उम्मीद खो चुके थे। इस तकनीक से न सिर्फ प्रराम्भी फिस्टुला बल्कि कई बार दुबारा हुए फिस्टुला का भी बिना किसी नुकसान के इलाज़ सम्भव है।

इन दोनों तकनीक में ज्यादातर मरीज दूसरे ही दिन बैठ पाते है और बहुत जल्दी अपना काम शुरू कर पाते है । पाइल्स एवं फिस्टुला कि बीमारी हेल्थ इंश्योरेन्स में कवर होती है ।